दुर्गूकोंदल आदिवासी बहुल और सुदूर वनांचल क्षेत्र कांकेर जिले से बुनियादी शिक्षा के कायाकल्प की एक सुखद तस्वीर सामने आ रही है। जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने और ग्रामीण बच्चों के समग्र विकास के लिए जिला प्रशासन ने सुपर 60 मॉडल स्कूल योजना शुरू की है। इसके तहत जिले में कुल 60 प्राथमिक स्कूलों को सर्वसुविधायुक्त मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। चयनित 60 मॉडल प्राथमिक स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा पहली से लेकर तीसरी तक के बच्चों को निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी शुरू से ही आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह सुविधा अब तक केवल बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूलों तक सीमित थी। जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद, जिला मिशन समन्वयक नवनीत पटेल ने बताया कि शिक्षकों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। वे भीषण गर्मी की परवाह किए बिना डोर-टू-डोर सघन सर्वे अभियान चला रही हैं। हमारा लक्ष्य है कि 30 जून की निर्धारित समय-सीमा से पहले सभी बच्चों का शत-प्रतिशत स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित हो जाए। चयनित सभी 60 स्कूलों वाले गांवों में चौपाल लगाई जा रही है। ऐसी ही चौपाल दुर्गूकोंदल के ग्राम डांगरा में लगी। तेज धूप में डांगरा के ग्रामीणों ने रंगमंच में लगी चौपाल में निर्णय लिया कि वे अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूल भेजने के बजाय अपने गांव के ही शासकीय प्राथमिक अंग्रेजी माध्यम मॉडल स्कूल में दाखिला दिलाएंगे। वे आसपास के अन्य गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाएंगे। चौपाल में सरपंच राजेंद्र नरेटी, जगदेव कोरेटी, हेमंत ठाकुर, रामेश्वर कुलदीप, कमला नरेटी, हेमंत व अन्य रहे। ^ इन स्कूलों में केवल भाषा नहीं बदलेगी। अध्यापन की पद्धति भी आधुनिक और रोचक बनाई जाएगी। इसके लिए विशेष टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल्स) युद्ध स्तर पर मुहैया करवाई जा रही हैं। टीएलएम सहायक साधन और उपकरण होते हैं। इनका उपयोग शिक्षक कक्षा में बच्चों को आसानी से और रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए करते हैं। हर कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या निश्चित नहीं रहेगी। यदि विद्यार्थी की संख्या अधिक होती है तो शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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