देश में फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार इन अदालतों में करीब 2.5 लाख मामले अब भी लंबित हैं। पिछले साल दर्ज हुए 1.4 लाख दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में से केवल 66,500 मामलों का निपटारा हो सका। तेज सुनवाई के उद्देश्य से बनाए गए फास्ट ट्रैक कोर्ट अपेक्षित गति से काम नहीं कर पा रहे हैं। लंबित मामलों के बढ़ने से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित फैसले की जरूरत है। न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ और संसाधनों की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। अदालतों में मामलों के निपटारे की धीमी प्रक्रिया चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है। सरकार और न्यायपालिका के सामने लंबित मामलों को कम करना बड़ी चुनौती बन गया है।
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