लगातार दूसरे सीजन में प्रीमियर लीग की नौ टीमें यूरोपीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगी। इसका असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरेलू फुटबॉल पर भी दिखाई देगा। अधिक टीमों के यूरोप में खेलने से इंग्लैंड के घरेलू टूर्नामेंटों का शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। क्लबों को ज्यादा मैच खेलने पड़ेंगे, जिससे खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। लीग और कप मुकाबलों की तारीखों में बदलाव संभव है। छोटे क्लबों के लिए भी इसका अप्रत्यक्ष असर देखने को मिल सकता है। निचली लीग की टीमों को मुकाबलों और प्रसारण से जुड़ी परिस्थितियों में बदलाव झेलना पड़ सकता है। रिपोर्ट में यॉर्क सिटी जैसे क्लबों पर संभावित प्रभाव का भी जिक्र किया गया है। यूरोपीय प्रतियोगिताओं में बढ़ती भागीदारी इंग्लिश फुटबॉल की ताकत को दर्शाती है। इससे प्रीमियर लीग क्लबों की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि खिलाड़ियों की फिटनेस और टीम प्रबंधन बड़ी चुनौती बनेंगे। फुटबॉल कैलेंडर पहले से ज्यादा व्यस्त होने वाला है। प्रशंसकों को अधिक बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर आने वाले कई सीजन तक दिखाई देगा।
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