पेनपा त्सेरिंग ने 27 मई, 2026 को मैक्लोडगंज, धर्मशाला में एक समारोह में दूसरे कार्यकाल के लिए ‘केंद्रीय तिब्बती प्रशासन’ (सीटीए) के प्रमुख के रूप में शपथ ली। यह समारोह तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिन्हें लाल वस्त्र धारी भिक्षुओं द्वारा ढोल और मंत्रोच्चार के बीच स्थल पर लाया गया। शपथ सर्वोच्च तिब्बती न्याय आयोग के मुख्य न्यायाधीश येशी वांगमो ने दिलाई। इसके साथ ही त्सेरिंग का 2021 से चला आ रहा कार्यकाल आगे बढ़ गया है। उन्होंने फरवरी 2026 में भारत और विदेशों में रहने वाले तिब्बतियों के बीच हुए चुनावों में पांच साल का कार्यकाल हासिल किया था। त्सेरिंग ने शपथ लेने के बाद कहा कि उनकी सरकार दलाई लामा द्वारा प्रस्तावित ‘मध्य मार्ग नीति’ के प्रति पूरी तरह समर्पित है। इस नीति का उद्देश्य अहिंसा, संवाद और आपसी लाभ के जरिए चीन के साथ शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक चीनी सरकार के साथ गुप्त संचार जारी रखा जाएगा। चीन ने हालांकि निर्वासित सरकार को वैधता देने से इनकार करते हुए उसे ‘अमान्य’ बताया है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता के अनुसार, यह प्रशासन किसी संप्रभु देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना है, लेकिन वह यहाँ निर्वासित सरकार को मेजबानी देता है। त्सेरिंग से पहले 2011 में दलाई लामा ने राजनीतिक सत्ता से खुद को अलग कर लिया था, तब से यह चौथा प्रत्यक्ष चुनाव था। त्सेरिंग ने कहा कि वे दलाई लामा के विचारों को मूल में रखेंगे और तिब्बती समुदाय की भलाई के लिए काम करेंगे।
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