धर्मशाला स्मार्ट सिटी परियोजना में 33 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद तकनीकी खामियों के कारण पूरा सिस्टम प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रहा है। शहर की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए सिटी फाइबर नेटवर्क, सर्विलांस सिस्टम और डेटा सेंटर विकसित किए गए थे। लेकिन दो अलग-अलग कंपनियों द्वारा अलग-अलग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाने के कारण कैमरे एकीकृत नहीं हो पाए हैं। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने एसएनआर कंपनी को 349 कैमरे लगाने और 285 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का ठेका दिया था, जो ‘ई-वाहन’ सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा है। वहीं पुलिस विभाग द्वारा चामुंडा कॉरपोरेशन से लगाए गए 226 कैमरे अलग सॉफ्टवेयर पर आधारित हैं। दोनों सिस्टम एक ही कमांड सेंटर से नहीं जुड़ पा रहे हैं, जिससे एकीकृत निगरानी व्यवस्था का लक्ष्य अधूरा रह गया है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी असंगति के कारण यह समस्या बनी हुई है। इस मामले में वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है।
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