92 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना के एक पूर्व कैप्टन अपनी जमीन को कथित धोखाधड़ी से बचाने के लिए कानूनी संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में देश की सेवा की थी। आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना उनकी जमीन का फर्जी तरीके से पंजीकरण और हस्तांतरण कर दिया गया। मामले की शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप से प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। जांच में जमीन के दस्तावेजों और पंजीकरण प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। पूर्व सैन्य अधिकारी का कहना है कि उन्हें इस हस्तांतरण की कोई जानकारी नहीं थी। प्रशासन अब कथित धोखाधड़ी की सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले का उद्देश्य पीड़ित की जमीन वापस दिलाना और दोषियों को कानून के दायरे में लाना है। इस घटना ने वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति सुरक्षा और भूमि संबंधी धोखाधड़ी के मामलों पर भी चिंता बढ़ा दी है।
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