ड्रोन वॉर के क्षेत्र में ईरान अमेरिका को अपनी रणनीति और सस्ते लेकिन प्रभावी ड्रोन सिस्टम के जरिए चुनौती दे रहा है। ईरान विशेष रूप से शाहेद-136 जैसे कामिकाज़े ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। इन ड्रोन को कम लागत में तैयार किया जाता है, लेकिन इनका इस्तेमाल सामूहिक हमलों के लिए किया जाता है। माना जाता है कि हजारों की संख्या में इन ड्रोन के स्वार्म के जरिए किसी भी देश के डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनाया जा सकता है। इनका उद्देश्य दुश्मन के एयर डिफेंस को थकाना और कमजोर करना होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनका इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने की रणनीति में किया जा रहा है। विशेषज्ञ इसे आधुनिक युद्ध का नया रूप मान रहे हैं। यह तकनीक पारंपरिक महंगे हथियारों की तुलना में अधिक लागत-प्रभावी मानी जाती है। इससे वैश्विक सैन्य रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। ड्रोन तकनीक अब युद्ध का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।
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