डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार नेशनल हाईवे परियोजनाओं के निर्माण में लगी कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय जल्द ही एक नई नीति लेकर आएगा, जिसके तहत कंपनियों को डीजल की बढ़ी हुई लागत का हर्जाना दिया जाएगा। वर्तमान में हाईवे परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की कीमतें भी काफी बढ़ चुकी हैं। बिटुमेन का दाम 28 फरवरी के 49,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर 1 जून तक 80,000 रुपये प्रति टन हो गया है। इसी तरह डीजल की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है। मंत्रालय ने पहले ही बिटुमेन की बढ़ती कीमतों के लिए मासिक आधार पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था लागू की थी। अब उसी तर्ज पर डीजल के लिए भी प्रावधान किया जा रहा है। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नई नीति के तहत हाईवे एजेंसियां बेस रेट और डीजल के मौजूदा भाव के बीच के अंतर का भुगतान करेंगी। यह कदम निर्माण कंपनियों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य हाईवे निर्माण कार्यों को बिना किसी रुकावट के समय पर पूरा करना है। उम्मीद है कि इस नई नीति की घोषणा जल्द ही आधिकारिक रूप से कर दी जाएगी। इससे बुनियादी ढांचे के विकास में लगे ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलेगी।
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