अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी में डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। पार्टी के नेताओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ट्रंप के प्रति अपनी वफादारी साबित करना बन गई है। हाल के प्राथमिक चुनावों में कई ऐसे नेताओं को हार का सामना करना पड़ा जो ट्रंप के करीबी नहीं माने जाते थे। सीनेटर जॉन कॉर्निन की हार को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल कट्टर रूढ़िवादी विचारधारा अब पर्याप्त नहीं रह गई है। पार्टी में टिके रहने के लिए ट्रंप का समर्थन जरूरी माना जा रहा है। इससे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर वैचारिक विभाजन और गहरा होता दिख रहा है। कई नेता सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना करने से बच रहे हैं। उनका ध्यान अब पार्टी की नीतियों से ज्यादा ट्रंप की मंजूरी पाने पर केंद्रित हो गया है। दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में कई मतदाता इस स्थिति को लेकर असहज नजर आ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे पार्टी में स्वतंत्र विचारों की जगह कम हो रही है। ट्रंप समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व का संकेत मानते हैं। आने वाले चुनावों में यह शक्ति संतुलन अमेरिकी राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
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