टॉम्स कंपनी ने अपने ‘वन-फॉर-वन’ मॉडल से उपभोक्तावाद की परिभाषा बदल दी, जिसमें हर खरीद पर जरूरतमंद बच्चे को जूतों की एक जोड़ी दान की जाती थी। इस सरल वादे ने सामान्य खरीदारी को दान का कार्य बना दिया। कंपनी ने साबित किया कि सामाजिक जिम्मेदारी को व्यवसाय के केंद्र में रखा जा सकता है। हालाँकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे मॉडलों को स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक मुफ्त दान से कभी-कभी स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है। टॉम्स ने बाद में अपने मॉडल में बदलाव कर स्थानीय उत्पादन और सामुदायिक विकास पर ध्यान दिया। यह मॉडल सामाजिक उद्यमिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। आज कई ब्रांड इसी तर्ज पर बिक्री और दान को जोड़ रहे हैं। टॉम्स की सफलता ने दिखाया कि ग्राहक ‘अच्छा करने’ वाले ब्रांडों को तरजीह देते हैं।
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