राज्य शिक्षा विभाग में एक जूनियर प्राचार्य को वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर पदस्थ करने के मामले ने कानूनी रूप ले लिया है। इस नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया कि राज्य सरकार के प्रचलित नियमों और सर्कुलर के अनुसार, किसी भी कनिष्ठ अधिकारी को उसके वरिष्ठों के अधीन पदस्थ करना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उक्त नियुक्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले को प्रशासनिक नियुक्तियों में वरिष्ठता के उल्लंघन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब विभाग को इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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