2026 के मई तक दुनिया भर में तकनीकी क्षेत्र में 1 लाख 15 हज़ार से अधिक कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। 2025 से यह डर फैलाया गया था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लाखों लोगों की नौकरियाँ खा जाएगा। बड़ी तकनीकी कंपनियों ने बिना सोचे-समझे अपने कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया, यह मानते हुए कि AI उनकी जगह ले लेगा। लेकिन अब समय बदल चुका है। वही AI जिस पर कंपनियों को घमंड था, अब उनके लिए सिरदर्द बन गया है। AI सिस्टम को ठीक से चलाने, डिबग करने और विकसित करने के लिए अनुभवी इंसानी दिमाग की जरूरत पड़ रही है। कई कंपनियाँ अब पछता रही हैं क्योंकि उन्होंने अपने महत्वपूर्ण कर्मचारियों को खो दिया है। नई नौकरियाँ भी आ रही हैं, लेकिन उनके लिए पहले से अलग कौशल चाहिए। अब सीखने और अनुकूलन का समय है, न कि केवल AI पर निर्भर रहने का।
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