भारत में साल 2016 को भीषण गर्मी के लिए याद किया जाता है। उस दौरान कई राज्यों में तापमान ने रिकॉर्ड स्तर को छू लिया था। गर्म हवाओं और लू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था। हालात इतने खराब थे कि सड़कें तपने लगी थीं और लोगों की चप्पलें तक पिघलकर सड़क पर चिपक रही थीं। कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिलता था। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलते थे। गर्मी के कारण पानी और बिजली की मांग भी अचानक बढ़ गई थी। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी थी। मौसम विशेषज्ञों ने इसे असामान्य और खतरनाक गर्मी की लहर बताया था। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और अधिक कठिन हो गई थी। खेती और पशुपालन पर भी इसका असर पड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी गर्मी की घटनाएं बढ़ रही हैं। आज भी 2016 की वह गर्मी लोगों के लिए डरावनी याद बनी हुई है।
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