1901 में वियना के वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ने अपनी प्रयोगशाला में खून के नमूनों को मिलाते समय देखा कि कभी-कभी रक्त कोशिकाएं आपस में चिपक जाती हैं (क्लंपिंग)। इस साधारण से प्रयोग ने उन्हें मानव रक्त के A, B और O समूहों की खोज करने में मदद की। उनके इस अनुसंधान से पहले रक्त-आधान (ट्रांसफ्यूजन) में अक्सर मरीजों की मौत हो जाती थी, क्योंकि असंगत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया जाता था। लैंडस्टीनर ने यह सिद्ध कर दिया कि केवल एक ही समूह का रक्त ही सुरक्षित रूप से चढ़ाया जा सकता है। इस खोज ने ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन को एक अनुमानित विज्ञान बना दिया और अनगिनत जानें बचाईं। बाद में उनके शोध ने रीसस (Rh) फैक्टर की खोज का भी मार्ग प्रशस्त किया। 1930 में उन्हें इसके लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज ब्लड ग्रुपिंग आधुनिक चिकित्सा का एक अनिवार्य हिस्सा है।
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