महासमुंद जिले के स्कूलों में छात्रवृत्ति प्रकरणों के लंबित रहने को लेकर प्रशासन और शिक्षकों के बीच विवाद बढ़ गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने सत्र 2025-26 की लंबित राज्य छात्रवृत्ति के आधार पर संस्था प्रमुखों यानी प्रधानपाठकों का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त प्रधान पाठक कल्याण संघ ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है। संघ ने कार्रवाई को एकतरफा और दबाव बनाने वाला कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार एसटी, एससी और ओबीसी विद्यार्थियों की ई-केवाईसी तथा आधार-सीडेड बैंक खातों का सत्यापन लंबित है। जिन स्कूलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहां के संस्था प्रमुखों पर कार्रवाई की बात कही गई है। संघ का कहना है कि शिक्षकों ने पहले ही लंबित मामलों को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। संगठन ने कहा कि बैंक खाता सीडिंग, राशन कार्ड ई-केवाईसी और डीबीटी मैपिंग जैसी प्रक्रियाएं तकनीकी हैं। इन प्रक्रियाओं में बैंकों और खाद्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। संघ के मुताबिक स्कूल स्तर से अभिभावकों को बैठकों और नोटिस के माध्यम से लगातार जानकारी दी जा रही है। संगठन ने ग्राम पंचायत या संकुल स्तर पर बैंक, शिक्षा और खाद्य विभाग के संयुक्त शिविर लगाने का सुझाव दिया है। छात्रवृत्ति को राशन कार्ड ई-केवाईसी से अलग रखने और पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने की मांग भी की गई है। संघ ने वेतन रोकने का आदेश वापस लेकर शिक्षकों को व्यावहारिक समय-सीमा देने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
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