छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म पीड़िता द्वारा आत्महत्या करने के मामलों में सुसाइड नोट का होना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केवल सुसाइड नोट की अनुपस्थिति के आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। कसडोल से जुड़े एक मामले में आरोपी पर दुष्कर्म के बाद पीड़िता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप था। निचली अदालत द्वारा दी गई 10 साल की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। यह फैसला ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस निर्णय को पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी आधार पर अपराधी को छूट नहीं दी जा सकती।
Source: Source