छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ दवा निगम (CGMSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्य प्रदेश में ‘अमानक’ (Substandard) लैक्टुलोज दवा की आपूर्ति के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी ‘यूनिकेयर इंडिया लिमिटेड’ से छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर दवाइयों की खरीदी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी द्वारा सप्लाई की गई दवाओं के तीन बैच गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने न तो उनका अनुबंध निरस्त किया है और न ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया है।
**मामले के मुख्य बिंदु:**
* **करोड़ों का टेंडर:** छत्तीसगढ़ दवा निगम (CGMSC) द्वारा इस कंपनी से हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये की दवाइयां खरीदी जा रही हैं।
* **सुरक्षा से खिलवाड़:** अमानक दवाओं की आपूर्ति सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है, फिर भी प्रशासन का रुख ढुलमुल बना हुआ है।
* **कार्रवाई का अभाव:** छत्तीसगढ़ में फेल बैच की रिपोर्ट आने के बाद भी कोई ठोस प्रशासनिक कदम न उठाना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
जनस्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब विपक्ष और नागरिक समाज अनुबंध की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। क्या शासन स्तर पर इस कंपनी को संरक्षण दिया जा रहा है? यह एक बड़ा जांच का विषय है।
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