छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कई दवाओं को अवमानक और मिथ्याछाप घोषित किया है। इनमें प्रसव में उपयोग होने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी शामिल है। दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम की कई दवाएं लैब टेस्ट में फेल हो गई हैं। एफडीए ने संबंधित बैच की दवाओं की बिक्री, वितरण और भंडारण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। रायपुर की प्रयोगशाला में चार अन्य दवाओं के नमूने भी मानकों में खरे नहीं उतरे। इनमें हरिद्वार, सोलन और नालागढ़ की कंपनियों की दवाएं शामिल हैं। एफडीए ने सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों से मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों में जांच कर स्टॉक जब्त करने को कहा है। विभाग ने इन बैचों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आम लोगों को भी सतर्क रहने और साइड इफेक्ट होने पर हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की गई है। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में कई दवाएं जांच में फेल हो चुकी हैं। पिछले साल अल्बेंडाजोल टैबलेट और एमोक्सिसिलिन जैसी दवाएं भी अवमानक पाई गई थीं। एक फंगल इंफेक्शन की क्रीम तो पूरी तरह नकली मिली थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। एफडीए ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। फिलहाल अवमानक दवाओं की बिक्री पर रोक के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है।
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