घने जंगल, पहाड़ों से उतरते झरने, कल-कल बहती नदियां, ऐतिहासिक धरोहरें और समृद्ध जनजातीय संस्कृति से सजा जशपुर जिला अब एक नए अंदाज में देश-विदेश के लोगों तक पहुंचने जा रहा है। छत्तीसगढ़ी गीत “जन्नत जशपुर” के जरिए जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जशपुर के ही युवा कलाकार गौरव गुप्ता द्वारा लिखित यह विशेष गीत जल्द ही टी म्यूजिक पर रिलीज किया जाएगा। गीत को लेकर स्थानीय लोगों और कला प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। “जन्नत जशपुर” केवल एक मनोरंजन गीत नहीं, बल्कि जशपुर जिले की खूबसूरती, संस्कृति और पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने का प्रयास है। स्थानीय कलाकारों और तकनीकी टीम के संयुक्त सहयोग से तैयार किया गया यह गीत जशपुर की वादियों को सिनेमाई अंदाज में दुनिया के सामने पेश करेगा। गीत में जिले की हरियाली, शांत वातावरण, प्राकृतिक संपदा और जनजातीय जीवन शैली को बेहद आकर्षक ढंग से फिल्माया गया है। गीत की शूटिंग जशपुर जिले के कई प्रसिद्ध पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों पर की गई है। इसमें किनकेल गांव, मधेश्वर महादेव, रानीदाह, ईब नदी, सतीघाट, लोरोघाट और जिले के प्रसिद्ध चाय बागानों की खूबसूरती को खास तरीके से कैमरे में कैद किया गया है। हर दृश्य में जशपुर की प्राकृतिक समृद्धि और शांत वातावरण की झलक दिखाई देती है। गीत में पहाड़ियों, जंगलों और झरनों को सिनेमाई तकनीक के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि दर्शक जशपुर की ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाएंगे। गीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी सांस्कृतिक प्रस्तुति को माना जा रहा है। कलाकारों ने स्थानीय संस्कृति को जीवंत रूप में उभारा है। गीत के माध्यम से स्थानीय बोली, पहनावा और जनजातीय परंपराओं को आधुनिक संगीत के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। गीत के लेखक गौरव गुप्ता ने कहा कि “जन्नत जशपुर केवल एक गीत नहीं, बल्कि जशपुर की संस्कृति, प्रकृति और पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है। हमारा उद्देश्य है कि लोग जशपुर की सुंदरता को देखें, यहां आएं और इस धरती की प्राकृतिक समृद्धि को करीब से महसूस करें।उन्होंने बताया कि इस गीत के माध्यम से जिले की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। साथ ही स्थानीय कलाकारों को मंच देने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
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