यूरोप के कई अमीर देशों, खासकर बेल्जियम, इटली, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम में जेलों में भीड़भाड़ का संकट गंभीर होता जा रहा है। कैदियों को ‘पिंजरे में चूहों की तरह’ रहने को मजबूर किया जा रहा है, जहाँ हर तरफ अव्यवस्था और बदहाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जेलों में तय क्षमता से दोगुने से अधिक कैदी रह रहे हैं, जिससे साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और मानवाधिकारों का ह्रास हुआ है। बेल्जियम में तो कैदियों को एक कमरे में चारपाई तक नहीं मिल पाती और उन्हें जमीन पर सोना पड़ता है। कोविड के बाद से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने के कारण सजायाफ्ता कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इसे ‘मानवीय संकट’ करार दिया है और सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फ्रांस और इटली ने कुछ नरम उपाय अपनाए हैं, लेकिन अभी यह समस्या बरकरार है। यूरोपीय संघ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुए तो यह स्थिति और बदतर हो सकती है। कई देशों में नई जेलें बनाने की योजना है, लेकिन बजट की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
Source: Source