चंडीगढ़ जिला अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार ने कहा कि अदालत द्वारा लगाई गई लागत का भुगतान करना कानूनी बाध्यता है। मामला जोगिंदर कुमार नागपाल बनाम सब डिविजनल मजिस्ट्रेट से जुड़ा है। प्रशासन ने न तो समय पर जवाब दाखिल किया और न ही पहले लगाए गए 1000 रुपए के खर्चे जमा किए। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष का धारा-5 लिमिटेशन एक्ट के तहत आवेदन के खिलाफ जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर दिया। सीपीसी की धारा 35-बी के तहत बिना लागत भुगतान के बचाव जारी नहीं रख सकते। अदालत ने कहा कि प्रशासन को पहले भी कई मौके दिए गए, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। अब उसे अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं दिया जाएगा। याचिकाकर्ता की देरी माफी अर्जी पर अब प्रशासन का कोई लिखित जवाब रिकॉर्ड पर नहीं होगा। अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय हुई है। उस दिन देरी माफी आवेदन पर एकतरफा सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा। इस आदेश से याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है।
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