अमृतसर के गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर विशेष धार्मिक समागम आयोजित किए जा रहे हैं। पर्व के अवसर पर गोल्डन टेंपल परिसर को करीब 60 टन फूलों से सजाया गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए स्वर्ण मंदिर पहुंच रहे हैं। पुरातन परंपरा के अनुसार गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से गोल्डन टेंपल तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा। नगर कीर्तन में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सिंह साहिबान और प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। गोल्डन टेंपल, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए जाएंगे। रात में गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में शब्द विचार और कीर्तन समागम होगा। गोल्डन टेंपल परिसर में रात को दीपमाला और आतिशबाजी भी की जाएगी। सिख इतिहास के अनुसार, गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। इस अवसर पर बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी और वे पहले ग्रंथी बने थे। गुरु ग्रंथ साहिब के लेखन का कार्य 1603 में गुरु अर्जन देव जी ने भाई गुरदास से शुरू करवाया था। 1604 में यह कार्य पूरा हुआ और इसे उस समय आदि ग्रंथ नाम दिया गया। बाद में गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु तेग बहादुर जी की बाणी शामिल कर इसे पूर्ण स्वरूप दिया। 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया। गुरु ग्रंथ साहिब आपसी भाईचारे, मानवता, सद्भाव और समानता का संदेश देने वाला पवित्र ग्रंथ माना जाता है।
Source: Source