छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ शहर में सरकारी जमीन के अवैध प्लाटिंग का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी जमीन को 22 टुकड़ों में बेच दिया गया। यह मामला लगभग आठ महीने पुराना है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासन ने न्यायालय परिसर के सामने ठेले-खोमचे वालों को हटाने में तत्परता दिखाई, लेकिन उसी परिसर के सामने अवैध प्लाटिंग पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस दोहरे मापदंड ने प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के कारण मामले को फाइलों में दबाकर रखा गया है। अवैध प्लाटिंग के कारण सरकारी भूमि की बिक्री से राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें धोखे से प्लॉट बेचे गए, जबकि जमीन कानूनी नहीं थी। प्रशासन के पास इस मामले की शिकायत पहले से मौजूद है, लेकिन जांच में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्षी पार्टी सरकार की लापरवाही को लेकर हमलावर है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। यह घटना राज्य में भू-माफिया के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। जनता प्रशासन से सख्त कदम उठाने की उम्मीद कर रही है।
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