कोरोना महामारी के दौरान टेक कंपनियों ने तेजी से बड़े पैमाने पर भर्तियां की थीं, जिसे अब कई विशेषज्ञ ‘ओवर हायरिंग करेक्शन’ के रूप में देख रहे हैं। वर्तमान में कंपनियां लागत कम करने के लिए लगातार छंटनी (layoffs) कर रही हैं, जिससे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है। महामारी के समय जरूरत से अधिक इंजीनियर्स को नियुक्त किया गया था, लेकिन अब मांग और आपूर्ति के संतुलन में बदलाव देखा जा रहा है। इस स्थिति ने टेक सेक्टर में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कोडिंग टूल्स जैसे GitHub Copilot और अन्य जनरेटिव AI सिस्टम को भी एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। ये टूल्स कई प्रोग्रामिंग कार्यों को तेजी से और कम लागत में पूरा करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग से डेवलपमेंट प्रोसेस अधिक ऑटोमेटेड हो रहा है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि AI पूरी तरह से मानव इंजीनियर्स की जगह नहीं ले सकता, बल्कि उनकी भूमिका को बदल रहा है। इस बदलाव के कारण स्किल सेट और नौकरी की प्रकृति दोनों में बड़ा परिवर्तन देखा जा रहा है। टेक इंडस्ट्री में भविष्य की नौकरियों को लेकर बहस तेज हो गई है।
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