यह आंदोलन खुद को आम युवाओं का प्रतिनिधि बताता है। लेकिन इसकी जमीनी भागीदारी सीमित नजर आती है। यह अधिकतर अंग्रेज़ी बोलने वाले शहरी युवाओं तक केंद्रित है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय लोग प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण युवाओं की भागीदारी बेहद कम है। प्रवासी मजदूर इस आंदोलन में लगभग अनुपस्थित हैं। डिजिटल पहुंच से वंचित वर्ग भी इससे दूर है। आलोचकों का मानना है कि यह प्रतिनिधित्व का दावा अधूरा है। आंदोलन की वास्तविक पहुंच और प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया आधारित सक्रियता और जमीनी वास्तविकता में अंतर दिखता है। इस कारण आंदोलन की व्यापकता पर बहस तेज हो रही है।
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