छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक प्रोफेसर की नौकरी से जुड़े मामले में फैसला सुनाया। प्रोफेसर के खिलाफ किशोरावस्था में कुछ मामले दर्ज हुए थे। इन मामलों में उन्हें बाद में अदालत ने बरी कर दिया था। करीब 30 साल बाद उनकी नौकरी पर कार्रवाई का मामला सामने आया। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि पुराने मामलों में बरी हो चुके व्यक्ति को इतनी लंबी अवधि के बाद नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज मामलों में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था। अदालत ने उनकी सेवा से जुड़े अधिकारों को ध्यान में रखा। हाईकोर्ट के फैसले से प्रोफेसर को राहत मिली। अदालत ने मामले में लंबे समय बीतने के पहलू को भी महत्वपूर्ण माना। यह फैसला छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवा से जुड़े मामलों के संदर्भ में आया। कोर्ट के निर्णय के बाद प्रोफेसर की नौकरी पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई।
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