आधुनिक कारों में सुरक्षा मानकों को बढ़ाने के चक्कर में डिजाइन से जुड़े कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं, जो अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 8 वर्षों में ब्लाइंड स्पॉट के कारण करीब 3,000 लोगों की जान गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण कारों में लगाए गए ‘मोटे A-पिलर’ हैं। हालांकि ये पिलर कार पलटने की स्थिति में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन इनकी मोटाई के कारण ड्राइवर की विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो जाती है। इस ब्लाइंड स्पॉट के कारण सड़क पार करते पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों को देख पाना कठिन हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। यह समस्या केवल बोनट की ऊंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन में सुधार के नाम पर हुई यह चूक अब एक बड़ी सार्वजनिक सुरक्षा समस्या बन गई है। ऑटोमोबाइल जगत में अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि सुरक्षा और दृश्यता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
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