सरकार ने यूएपीए बहस पर सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि क्या अजमल कसाब को मुकदमे में देरी के कारण जमानत दी जाती। यह सवाल उस समय उठा जब अदालत में यूएपीए के तहत मुकदमों में देरी को लेकर चर्चा हो रही थी। सरकार ने कहा कि यदि कसाब को जमानत दी जाती तो यह देश के लिए बड़ा खतरा होता। सरकार का तर्क था कि यूएपीए के तहत मुकदमों में देरी के कारण आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने इस मामले में政府 से जवाब मांगा है। सरकार की ओर से कहा गया है कि यूएपीए के तहत मुकदमों में देरी के कारण आरोपियों को जमानत देने से देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इस मामले में अगली सुनवाई जल्द होगी।government की ओर से यह भी कहा गया है कि यूएपीए के तहत मुकदमों में देरी के कारण आरोपियों को जमानत देने से देश के नागरिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
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