कर्नाटक में नई मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जोड़ी बनने के बाद कांग्रेस के भीतर संभावित सत्ता संघर्ष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से पुराने राजनीतिक समीकरण फिर सुर्खियों में आ गए हैं। अतीत में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए परमेश्वर और तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मतभेद रहे थे। उनके और शीर्ष नेतृत्व के बीच कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति भी देखी गई थी। अब उनकी नई भूमिका को पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की रणनीति माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला जातीय और गुटीय समीकरणों को साधने के उद्देश्य से लिया गया है। परमेश्वर मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। उपमुख्यमंत्री पद देकर उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश के संकेत देखे जा रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में आंतरिक एकता बनाए रखना चाहता है। हालांकि पुराने अनुभवों के कारण सत्ता के दो केंद्र बनने की आशंका भी जताई जा रही है। पार्टी के विभिन्न गुटों की भूमिका आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगी। नई सरकार के कामकाज पर इन राजनीतिक समीकरणों का प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल नेतृत्व इसे सहयोग और समन्वय का मॉडल बताने की कोशिश कर रहा है।
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