महाराष्ट्र के पाचोड गांव की सुनीता नेहरे ने खेती के तरीकों में बदलाव कर अपने परिवार की कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। शुरुआती दौर में उन्हें फसल की कम पैदावार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने खेती में सुधार करने का प्रयास जारी रखा। बाद में उन्हें परिवार की जमीन के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली। सुनीता ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कपास की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान दिया। उनके प्रयासों से परिवार की खेती में महत्वपूर्ण बदलाव आया। उन्होंने केवल कपास पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी फसलों को भी अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। फसल विविधीकरण का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ बनाना है। कभी वह खेतों में काम करके प्रतिदिन ₹200 कमाती थीं और उसमें से ₹100 बचाती थीं। आज वह परिवार के 12 एकड़ खेत का प्रबंधन कर रही हैं। उनकी कहानी मेहनत, बचत और कृषि में नए तरीके अपनाने की मिसाल पेश करती है। उपलब्ध जानकारी में उनकी सालाना आय लगभग ₹2 लाख से शुरू होने का उल्लेख है, लेकिन स्रोत का विवरण अधूरा है।
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