भास्कर न्यूज | जालंधर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ के समक्ष जालंधर के सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास और लुधियाना के पर्यावरणविद् कपिल देव द्वारा दायर पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज बिल-2025 की सुनवाई शुक्रवार हो हुई। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता विजय दलाल ने न्यायाधिकरण को बताया कि पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज बिल, 2025 को आगामी पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में पारित किया जाएगा। कुछ विभागों से आपत्तियां और एनओसी मिलने में देरी के कारण प्रक्रिया लंबित रही, पर अब औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और विधेयक प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। तेजस्वी मिन्हास ने देरी को अनुचित एवं जानबूझकर किया गया बताते हुए कहा कि मौजूदा प्रारूप दांतहीन कानून जैसा है, जो मामूली जुर्माने के जरिए पेड़ कटाई को वैधता देता है और शहरी क्षेत्रों में अवैध कटाई की समस्या का प्रभावी समाधान नहीं करता। सुनवाई में राज्य के वन क्षेत्र के आंकड़ों का भी उल्लेख हुआ। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार पंजाब के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 3.65% ही वन क्षेत्र के अंतर्गत है और राज्य में करीब 1603 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। एनजीटी में अगली सुनवाई 15.09.2026 को निर्धारित की गई है।
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