मशहूर उर्दू शायर और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का भोपाल में 91 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे अपने समकालीन उर्दू ग़ज़लों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे। उनका शेर ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो’ करोड़ों लोगों के दिलों को छू गया। बशीर बद्र ने अपने करियर में व्यक्तिगत त्रासदी को पार करते हुए अदब की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया था। उनकी शायरी में प्रेम, जीवन और विरह की कोमल भावनाएँ झलकती थीं। उनके निधन से उर्दू साहित्य और शायरी प्रेमियों में शोक की लहर है। प्रशंसक और साहित्यकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनकी मृत्यु को हिंदी-उर्दू साहित्य की अपूरणीय क्षति बताई जा रही है।
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