बिलासपुर न्यायालय ने उत्तराधिकार विवाद के एक मामले में अहम हस्तक्षेप किया है। मामला भाई-बहनों के बीच मृतक की निवेश राशि के अधिकार को लेकर है। अदालत ने केवल नॉमिनी होने के आधार पर म्यूचुअल फंड की रकम हासिल करने के प्रयास पर रोक लगा दी। न्यायालय ने एसबीआई म्यूचुअल फंड्स को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार मृतक विश्वनाथ साक के निवेश की राशि फिलहाल प्रशांत साक को नहीं दी जाएगी। अदालत ने उत्तराधिकार प्रकरण के अंतिम निराकरण तक भुगतान रोकने का निर्देश दिया है। यदि मामला छह महीने के भीतर हल नहीं होता है, तब तक भी राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। इस आदेश का उद्देश्य उत्तराधिकार संबंधी दावे के निपटारे तक निवेश राशि को सुरक्षित रखना है। अदालत के हस्तक्षेप से विवादित संपत्ति के वितरण पर अस्थायी रोक लग गई है। मामले में नॉमिनी और वास्तविक उत्तराधिकार अधिकारों के बीच अंतर का मुद्दा सामने आया है। न्यायालय के निर्देश के बाद एसबीआई म्यूचुअल फंड्स को भुगतान संबंधी निर्णय में सावधानी बरतनी होगी। यह आदेश उत्तराधिकार विवादों में निवेश राशि के दावों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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