मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा 2011 में अमेरिकी स्टील्थ ड्रोन ‘RQ-170 सेंटिनल’ को पकड़े जाने की घटना फिर चर्चा में है। तेहरान ने दावा किया था कि उसके इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विशेषज्ञों ने ड्रोन को हाईजैक कर लिया था और उसे धोखा देकर सुरक्षित लैंडिंग कराई थी। इस तकनीक को अब ‘जीपीएस स्पूफिंग’ (GPS Spoofing) के रूप में जाना जाता है। यह घटना आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में नेविगेशन सिस्टम की भेद्यता को उजागर करती है और ड्रोन वारफेयर तथा उससे बचाव के उपायों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। यह प्रकरण आज भी सैन्य विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय बना हुआ है कि क्या यह महज एक तकनीकी खराबी थी या एक सोची-समझी साइबर-हाइजैकिंग।
Source: Source