आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय किशोर की रिमांड को रद्द कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस निनाला जयसूर्या और जस्टिस टीसीडी शेखर की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने पाया कि किशोर का जन्म 12 सितंबर 2008 को हुआ था। अपराध की तारीख पर उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। इसलिए उसे कानूनन नाबालिग माना जाना चाहिए था। अदालत ने कहा कि मामले में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधान लागू होते हैं। हाईकोर्ट के अनुसार पुलिस और मैजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेजने से पहले उसकी उम्र का उचित सत्यापन नहीं किया। उम्र की पुष्टि किए बिना उसे वयस्क आरोपी की तरह रिमांड पर भेजा गया। अदालत ने इस प्रक्रिया को कानून के अनुरूप नहीं माना। किशोरों से जुड़े मामलों में उनकी उम्र निर्धारित करना महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के मामलों को किशोर न्याय कानून के तहत ही निपटाया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर किशोर की रिमांड का आदेश रद्द कर दिया। फैसले में किशोर न्याय अधिनियम के तहत संरक्षण और प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया।
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