कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई गिरावट भारत के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिसलकर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। यह विकास भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है। शुक्रवार को भारतीय रिफाइनरों द्वारा खरीदी गई कच्चे तेल की दर 86.77 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई थी, जिसके अब वैश्विक ऊर्जा कीमतों में गिरावट के बाद और कम होने की उम्मीद है। यदि यह रुझान बना रहता है, तो इससे देश के आयात बिल में कमी आएगी और मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि अमेरिकी-ईरान डील से आपूर्ति बढ़ने की संभावना ने बाजार में नरमी का रुख पैदा किया है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं ताकि इसका लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके। ऊर्जा बाजार की यह स्थिरता भारतीय बाजार के लिए एक स्वागत योग्य बदलाव है।
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