मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से अवैध रेत उत्खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्होंने अवैध रूप से रेत निकालने और उसके परिवहन के लिए पूरी केवई नदी का सीना चीरकर बीचों-बीच एक पक्का रास्ता (अवैध मार्ग) बना डाला। माफियाओं द्वारा पर्यावरण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पहुंचाए गए इस भारी नुकसान के खिलाफ कानून का डंडा चला है। इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने और अवैध निर्माण पर गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब तलब किया है। स्थानीय पत्रकार न्यामुद्दीन अली के अनुसार, इस दुस्साहसिक कृत्य से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को अपूरणीय क्षति हुई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इतने बड़े पैमाने पर नदी के भीतर अवैध निर्माण होता रहा और स्थानीय प्रशासन व खनिज विभाग मूकदर्शक क्यों बना रहा? इस अदालती सख्ती के बाद अब जिला प्रशासन और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
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