छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति के एक लंबित मामले पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामला एक ऐसे आवेदक से जुड़ा है जिसे पिता की मृत्यु के सात वर्ष बाद भी नौकरी नहीं मिल सकी। अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य प्रभावित परिवार को समय पर राहत प्रदान करना होता है। लंबे समय तक मामलों को लंबित रखना इस उद्देश्य के विपरीत है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। न्यायालय ने मामले के शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही संबंधित विभाग को निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट ने चार महीने के भीतर मामले का अंतिम फैसला करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण पात्र आवेदकों को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। यह आदेश अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े अन्य लंबित मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले को लेकर प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।
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