शिमला में एक लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद में, अदालत ने एक डीएनए टेस्ट की मांग को अस्वीकार कर दिया है। यह मामला एक पति-पत्नी के बीच का है, जहां पति ने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाया है। अदालत ने कहा कि वह एक बच्चे की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए डीएनए टेस्ट की अनुमति नहीं दे सकती। इस मामले में अदालत ने यह भी कहा कि डीएनए टेस्ट से बच्चे को मानसिक क्षति हो सकती है। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि वह बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह मामला वैवाहिक विवाद के निपटारे में अदालत की भूमिका को भी रेखांकित करता है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि वह ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से निपटने का प्रयास करती है। इस फैसले से यह उम्मीद की जा सकती है कि अदालत आगे भी ऐसे मामलों में बच्चों के हितों की रक्षा करेगी।
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