तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक मतभेदों के बीच ऋतब्रत बनर्जी एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके बनर्जी ने दावा किया है कि विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी है। इस दावे ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उनके अनुसार, 58 बागी विधायकों का समर्थन उन्हें प्राप्त है। इन विधायकों ने पार्टी के भीतर नए नेतृत्व ढांचे का प्रस्ताव भी रखा है। माना जा रहा है कि यह विद्रोह हालिया चुनावी पराजय के बाद उभरे असंतोष का परिणाम है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह TMC के सामने अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बन सकती है। पार्टी नेतृत्व पर संगठनात्मक बदलाव और रणनीतिक पुनर्गठन का दबाव बढ़ गया है। घटनाक्रम के बाद संगठन में व्यापक स्तर पर समीक्षा और फेरबदल की चर्चा शुरू हो गई है। बागी गुट और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की राजनीति को और प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व और बागी खेमे के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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