विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। अब छात्र विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की बजाय अपने निवेश पर मिलने वाले रिटर्न (ROI) पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। बढ़ती ट्यूशन फीस, वीजा नियमों में बदलाव और वैश्विक नौकरी बाजार की परिस्थितियां इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। छात्र अब ऐसे संस्थानों को चुन रहे हैं जहां पढ़ाई के बाद रोजगार के बेहतर अवसर, इंटर्नशिप और पोस्ट-स्टडी वर्क राइट्स उपलब्ध हों। जर्मनी और फ्रांस जैसे देश अपनी किफायती शिक्षा और बेहतर करियर संभावनाओं के कारण अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब विश्वविद्यालयों को केवल ब्रांड वैल्यू पर नहीं, बल्कि स्पष्ट करियर परिणाम दिखाने पर ध्यान देना होगा। यह रुझान वैश्विक शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव दर्शाता है। छात्रों का फोकस अब दीर्घकालिक करियर स्थिरता और आर्थिक लाभ पर केंद्रित हो गया है।
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