देहरादून में इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) की मोहन फैक्ट्री के संभावित निजीकरण को लेकर विरोध तेज हो गया है। कंपनी के कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि IMPCL केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक है। रावत के अनुसार इस संस्थान ने आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने फैक्ट्री को निजी हाथों में सौंपने के प्रयासों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की मांग की। कर्मचारियों का भी मानना है कि संस्थान का निजीकरण उसके मूल उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है। विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारी अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस मुद्दे ने राज्य में राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
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