केंद्र सरकार ने IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर हिस्सेदारी घटाने से संबंधित कानूनी चिंताओं पर स्पष्टीकरण दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, IDBI (निरसन) अधिनियम, 2003 सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने की अनुमति देता है। मंत्रालय का कहना है कि इस कानून में हिस्सेदारी घटाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इस व्याख्या को दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले से भी समर्थन मिला है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायी चर्चाओं को मौजूदा कानून की व्याख्या का आधार नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में कानून के वास्तविक प्रावधानों के आधार पर ही सरकार की शक्तियों का आकलन किया जाना चाहिए। IDBI बैंक में सरकारी हिस्सेदारी घटाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। केंद्र सरकार पहले भी बैंक और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में विनिवेश की मंशा जाहिर कर चुकी है। केंद्रीय बजट में भी IDBI बैंक सहित संबंधित संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने की योजनाओं का उल्लेख किया गया है। विनिवेश के जरिए सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विनिवेश की समयसीमा और हिस्सेदारी बिक्री की अंतिम योजना का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
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