विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण है कमजोर होता रुपया, जो FII के मुनाफे को सीधे खा जाता है। जब रुपया फिसलता है, तो विदेशी निवेशक अपने पोर्टफोलियो को करेंसी लॉस से बचाने के लिए पैसा निकालना ही समझदारी समझते हैं। दूसरा कारण है लगातार बढ़ता कर बोझ और सेबी के सख्त नियम, जिससे बाजार में तरलता घट रही है। तीसरा कारण है शेयर ट्रांजेक्शन टैक्स (STT), जो भारत में दूसरे देशों की तुलना में काफी अधिक है। इस उच्च STT के कारण ट्रेडिंग लागत बढ़ जाती है, जिससे विदेशी निवेशक बाजार से दूर भाग रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि STT में कमी से FII की वापसी हो सकती है। सरकार पर अब दबाव है कि वह STT नीति पर पुनर्विचार करे। बाजार विश्लेषक कहते हैं कि यदि सरकार STT पर यू-टर्न लेती है, तो विदेशी पूंजी फिर से भारत की ओर रुख कर सकती है। केंद्र सरकार अभी इस मामले पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। लेकिन घटते FII प्रवाह और बाजार में गिरावट ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि आगामी बजट में STT में कटौती की घोषणा हो सकती है। तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करें। इस मुद्दे पर सरकार और रिजर्व बैंक भी करीबी निगरानी कर रहे हैं।
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