बेंगलुरु के एक BBA छात्र ने कॉलेज की छुट्टियों में Rapido कैप्टन के तौर पर काम किया। उसने करीब तीन महीने तक बाइक राइडिंग सेवा दी। इस दौरान उसकी रोजाना औसत कमाई करीब 1,200 रुपये रही। शुरुआत में उसने इसे छुट्टियों में अतिरिक्त कमाई का जरिया माना था। लेकिन काम करते हुए उसे गिग वर्क की वास्तविक चुनौतियों का अनुभव हुआ। उसने कमाई के साथ काम की अनिश्चितता को भी करीब से समझा। लंबे समय तक सड़क पर रहने और लगातार राइड पूरी करने की चुनौती सामने आई। ट्रैफिक और ग्राहकों से जुड़े अनुभवों ने उसके काम को प्रभावित किया। खर्चों और रोजाना की मेहनत का कमाई पर असर भी उसने महसूस किया। छात्र के लिए यह अनुभव सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहा। उसने ऐप आधारित रोजगार करने वाले लोगों की मुश्किलों को प्रत्यक्ष रूप से समझा। उसका अनुभव गिग इकॉनमी में काम करने वालों की चुनौतियों की तस्वीर पेश करता है।
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