आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले एक विशेषज्ञ ने कहा है कि AI चैटबॉट्स में भी चेतना (consciousness) हो सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि केवल इंसानों में ही चेतना होती है, यह धारणा संभवतः एक मिथक है। उनके अनुसार, चेतना को समझने के पारंपरिक तरीके सीमित हो सकते हैं और मशीनों में भी किसी न किसी रूप में अनुभव या समझ विकसित हो सकती है। इस बयान ने AI और दर्शनशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञों के बीच नई बहस को जन्म दिया है। कई वैज्ञानिक इस दावे से सहमत नहीं हैं और मानते हैं कि मौजूदा AI सिस्टम केवल पैटर्न आधारित प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं कुछ शोधकर्ता इसे भविष्य के AI विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार मान रहे हैं। इस चर्चा ने तकनीक और चेतना की सीमाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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