आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। हाल के दिनों में AI आधारित चैटबॉट्स को भ्रमित करके साइबर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी ‘प्रॉम्प्ट इंजेक्शन’ तकनीक का इस्तेमाल कर AI सिस्टम को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। इस तरीके में विशेष निर्देशों या संदेशों के जरिए AI को उसके मूल सुरक्षा नियमों से भटकाया जाता है। इसके बाद संवेदनशील जानकारी हासिल करने या हानिकारक गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास किया जाता है। WhatsApp, Instagram और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े उपयोगकर्ता भी ऐसे खतरों की चपेट में आ सकते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी संदिग्ध लिंक, संदेश या अनजान निर्देश पर भरोसा नहीं करना चाहिए। मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग सुरक्षा बढ़ा सकता है। नियमित रूप से ऐप्स और डिवाइस को अपडेट रखना भी जरूरी है। कंपनियां भी AI सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नई सुरक्षा तकनीकों पर काम कर रही हैं। प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसे हमले AI सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। जागरूकता और सावधानी ही ऐसे साइबर खतरों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।
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