दंतेवाड़ा जिले के दूरस्थ वनांचल में राष्ट्रीय मोबाइल और हाट बाजार मेडिकल यूनिट की सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। मुफ्त इलाज, पैथोलॉजी जांच और दवाइयां पहुंचाने के शासन के दावे अब कागजों तक सीमित रह गए हैं। विभागीय सांठगांठ के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर रोजाना फर्जी शिविर और मरीजों की जांच संख्या दर्ज की जा रही है। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि यूनिट में सीबीसी मशीन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद प्रतिदिन 20 से 30 फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। योजना के तहत निर्धारित 265 प्रकार की जीवनरक्षक दवाओं के बदले ग्रामीणों को सामान्य पैरासिटामोल जैसी दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं। शासन द्वारा अधिकृत जय अम्बे कंपनी का टेंडर 31 मई को समाप्त होना है, लेकिन जिले में समय-सीमा से पहले ही सभी मोबाइल मेडिकल वाहनों के पहिए थम गए हैं। पहले इन यूनिट्स से साप्ताहिक हाट बाजारों और विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल गांवों में नियमित मेडिकल कैंप लगाए जाते थे। इन यूनिट्स में एमबीबीएस डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन की पूरी टीम मौजूद रहती थी। मौके पर ही मरीजों के खून, यूरिन, शुगर, ब्लड प्रेशर, मलेरिया, टीबी और टाइफाइड सहित 40 से अधिक प्रकार के आवश्यक टेस्ट किए जाते थे। परामर्श के बाद गंभीर मरीजों को निशुल्क दवाइयां दी जाती थीं। अब यह पूरा तंत्र फर्जीवाड़े में तब्दील हो गया है, जिससे आदिवासी मरीजों की जान को खतरा पैदा हो गया है।
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