भास्कर न्यूज| अमृतसर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा पंजाब सरकार को जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून में आवश्यक सुधार करने के लिए दिए गए 15 दिन के अल्टीमेटम की अवधि समाप्त हो गई है। पंजाब सरकार द्वारा 13 अप्रैल को विधानसभा में पारित किए गए इस कानून को जत्थेदार गड़गज्ज ने नामंजूर कर दिया था। इसी संदर्भ में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा को 8 मई को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया था। तब जत्थेदार गड़गज्ज ने स्पीकर संधवा के माध्यम से आप सरकार को कानून में संशोधन करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फरमान को सिरे से खारिज करते हुए बेबाकी से कहा था कि न तो यह कानून वापस होगा और न ही इसमें कोई संशोधन किया जाएगा। अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकार की तरफ से जत्थेदार को कोई लिखित जवाब नहीं भेजा गया है। सरकार के इस अड़ियल रुख ने सिख समुदाय को भारी दुविधा में डाल दिया है, क्योंकि एक तरफ जहां जत्थेदार गड़गज्ज संशोधन करवाने पर अड़े हैं, वहीं मुख्यमंत्री भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सरकार की इस कोरी ना के बाद आगामी रणनीति पर गहन मंथन करने के लिए एसजीपीसी की ओर से 31 मई को गुरुद्वारा बाबा बकाला साहिब में सुबह 11 बजे से पंथक कॉन्फ्रेंस बुलाई गई है। इस कॉन्फ्रेंस की अगुवाई स्वयं जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज करेंगे। एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह ने विभिन्न सिख जत्थेबंदियों और संप्रदायों का आह्वान किया है कि वे इस कॉन्फ्रेंस में अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि सिख पंथ के लिए यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। इसलिए सभी को आपसी गिले-शिकवे दूर कर श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में एकजुट होना चाहिए। बलविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधकों और सेवादारों को ही दोषी के तौर पर पेश करके सिखों को गुरबाणी से तोड़ने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है, जिसे सिख कौम कभी स्वीकार नहीं करेगी। पंथक सूत्रों के अनुसार, भले ही अल्टीमेटम की अवधि समाप्त हो गई है, लेकिन जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज अब 31 मई को होने वाली पंथक कॉन्फ्रेंस के बाद ही मुख्यमंत्री भगवंत मान या स्पीकर कुलतार सिंह संधवा को दोबारा अकाल तख्त पर तलब करने को लेकर फैसला लेंगे।
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