तमिलनाडु के पूर्व भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने पार्टी लाइन से हटकर CBSE के संशोधित तीन-भाषा फॉर्मूले का सार्वजनिक विरोध किया है। उन्होंने अचानक लागू किए गए इस नियम को वापस लेने की मांग की है। अन्नामलाई का यह कदम पार्टी के भीतर दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि वे आमतौर पर पार्टी अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। उनकी इस असहमति को केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक साफ संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। तमिलनाडु में भाषा का मुद्दा हमेशा अति संवेदनशील रहा है और अन्नामलाई क्षेत्रीय भावनाओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम उनकी एक परिकलित राजनीतिक चाल मानी जा सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे भाजपा में उनके भविष्य के नेतृत्व की संभावनाओं पर भी असर पड़ेगा। द्रविड़ पार्टियों ने पहले ही तीन-भाषा नीति का कड़ा विरोध किया था। अन्नामलाई इस मुद्दे पर खुद को क्षेत्रीय नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं। दिल्ली में भाजपा नेतृत्व अब तक इस मामले पर चुप है। राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। अन्नामलाई ने अपने रुख से यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ एक केंद्र के चेहरे नहीं बल्कि क्षेत्रीय सरोकारों के आवाज भी हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी हाईकमान इस संकेत को कैसे लेता है।
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